Tuesday, August 9, 2016

बच्चों की उपस्थिति में वृद्धि

समर्पण के प्रयास से Domchanch के mica-mines area Dhab के Ghatwari Tola स्थित
school में बच्चों की उपस्थिति में लगातार वृद्धि........ सभी बच्चे अब uniform में एव नये दरी पर............

One day meeting among anganbari sevika, Sahiyika and Sahiya

one day meeting organized among aanganbari sevika, sahayika and sahiya at Pathaldiha and
discussed on the issues of immunization, bread feeding, institutional delivery, distribution of bleaching powder, call at tall free no 1098, health for all children etc......

Wednesday, July 27, 2016

बंगाखलार पंचायत को शराब, बालश्रम, बाल विवाह मुक्त पंचायत बनाने का निर्णय

बंगाखलार के शिवटोला में सामुदायिक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में पंचायत को शराब, बालश्रम,
बाल विवाह मुक्त पंचायत बनाने के अलावे मध्यान भोजन को नियमित करने, शिक्षकों की कमी की भरपाई, पूल का निर्माण, हाई स्कूल व स्वास्थ्य उपकेंद्र की स्थापना आदि की मांग जिलाधिकारी से करने का निर्णय लिया गया। 

Saturday, July 23, 2016

vacancy for Coordinator

Samarpan is a civil society institution working on the issues of Child Rights and protection at Koderma. For details of our work, Plz. Visit our website www.samarpanjharkhand.org
Samarpan are invited from the suitable candidate for childline on the post mentioned below on contractual basis:
Job Title
Job Location
Essential Qualifications
Salary/PM
Coordinator
Koderma
Master Degree in sociology/ Anthropology/MSW with 2-3 years experience in ground level activities, preferably in working with children is desirable. Especially in child protection and Rights will be an added qualification.
14000/

How to apply:

Interested Candidates are requested to send Application/CV at samarpanjharkhand@gmail.com or office address. The last date for receiving the application/CV for the above post is 30/07/2016 till 5:00 PM.

Note: Only shortlisted candidates will be contacted.


Thursday, July 14, 2016

Intimation of Quarterly Receipt of Foreign Contribution by Samarpan- April 2016 to June 2016

SAMARPAN, Koderma


Foreign Contribution Receipts - April 2016 to June 2016
No.
Date
Donor
Amount (In Rs.)
1.
5/5/2016
PHF, UK
8,97,550.00
2.
25/6/2016
Interest
   12,835.00
Total
9,10,385.00

Tuesday, June 28, 2016

आंगनबाड़ी केंद्र महज खिचड़ी केंद्र नहीं, बल्कि नर्सरी स्कूल हैं......

संस्था समर्पण की ओर से बाल अधिकार के मुद्दे पर एडभोकेशी और रणनीति निर्माण को लेकर जिलास्तरीय कार्यशाला का आयोजन स्थानीय वर्णवाल सेवा सदन में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महिला समाज के जिलाध्यक्ष उमा देवी ने किया।
बाल अधिकार जागरूकता अभियान के तहत आयोजित इस कार्यशाला में स्कूलपूर्व शिक्षा एवं शिक्षा अधिकार कानून के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर चर्चा की गयी। चर्चा में कहा गया कि आंगनबाड़ी केंद्र महज खिचड़ी केंद्र नहीं, बल्कि नर्सरी स्कूल हैं। यहां बच्चों को स्वस्थ्य एवं पोषण के साथ-साथ बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया जाता है। बच्चों को खेलकूद एवं मनोरंजन के माध्यम से गिनती, वर्णमाला, रंगों की पहचान, दिनों व महीनों के नाम आदि का ज्ञान दिया जाता है। ताकि, बच्चे 6 साल के बाद व स्कूल के वातावरण में सही सलामत शामिल होकर शिक्षा ले सके। ठीक उसी तरह  6-14 आयुवर्ग के हर बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य रूप से शिक्षा मिले इसके लिए कानून बनाया गया है। समुदाय, एसएमसी एवं पंचायत जनप्रतिनिधियों के बगैर इस कानून का धरातलीकरण संभव नहीं है।
कार्यशाला में सलैयडीह एवं बसधरवा स्कूल व आंगनबाड़ी को माॅडल बनाने, बुनियादी सुविधाओं से लैस करने, आरटीई के नोम्र्स के अनुरूप विधालय का संचालन के लिए सरकार व प्रशासन पर दवाब बनाने, मिडिया का सहयोग लेने, आंगनबाड़ी सेविका एवं शिक्षकों को सहयोग करने, सुविधाओं के लिए बड़े पैमाने पर टाॅल फ्री नंबर (181, 1098, 18003456542, 18003456542) का प्रयोग करने, सूचना अधिकार का प्रयोग करने, बाल श्रमिक एवं छिजित बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए अभिभावकों को प्रेरित करने, एवं जागरूकता फैलाने आदि निर्णय लिये गये।

Some Paper clips







Monday, June 13, 2016

मॉडल बनेगा आंगनबाड़ी केंद्र सलैयडीह

आंगनबाड़ी केंद्र सलयडीह को जन सहयोग से मॉडल आंगनबाड़ी नर्सरी स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा।  इस बात को लेकर माता समिति की आज बैठक हुई. 

कोडरमा का मध्य विधालय बसधरवा को माॅडल विधालय बनाने का निर्णण

कोडरमा का मध्य विधालय बसधरवा को माॅडल विधालय बनाने का निर्णण स्कूल प्रबंधन समिति ने लिया है। फिलहाल विधालय की स्थिति लचर है। अभिभावक चाहकर भी इस विधालय में अपने बच्चों को न भेजकर प्राइवेट विधालयों में भेजने को विवश है। इस स्थिति को देखते हुए समर्पण के द्वारा एसएमसी सदस्यों की बैठक बुलाई गयी। मौजूदा स्थिति की चर्चा की गयी। फिर, विधालय को आदर्श विधालय बनाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए विधालय में व्याप्त कमियों को दूर करने के लिए सभी उच्चाधिकारियों को ज्ञांपन
सौंपने एवं शिक्षकों को सहयोग करने का निर्णय लिया गया। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि विधालय में कुल कक्षा 8 है और शिक्षक केवल 4 हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। शौचालय, बाॅन्डी वाल, किचन शैड, बर्तन, छा़त्रवृति आदि का घोर अभाव है। बैठक की अध्यक्षता एसएमसी के अध्यक्ष बैजनाथ प्रसाद यादव ने किया। इस बैठक में मुख्य रूप से समर्पण के सचिव इन्द्रमणि साहू, प्रधानाध्यापक रविन्द्र यादव, संजय कुमार यादव, जसवा देवी, रेखा देवी, सुनिता देवी, मुनिया देवी, विरेन्द्र यादव, रामचंद्र यादव, बाल संसद के सदस्य राहुल कुमार राणा, उप मुखिया उमेश यादव, बसंती देवी, क्रेज के तुलसी कुमार साव, भगिया देवी, गीता कुमारी चैरसिया, सरोज कुमारी, अमोला देवी, गजाधर कुमार आदि उपस्थित थे। 

हम न बाल विवाह करेंगे ओर न ही अपनी जानकारी में किसी का बाल विवाह होने देंगे।

संस्था समर्पण एवं क्रेज झारखंड की ओर से इंदरवा पंचायत को बाल विवाह मुक्त गांव बनाने के उद्देश्य से सलैयडीह स्कूल में शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में इंदरवा पंचायत के विभिन्न गांवों में गठित किशोरी कल्ब, महिला मंडल, माता समिति, एसएमसी के सदस्यों एवं स्थानीय पंचायत
जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान यह बात कही गयी कि बाल विवाह कानूनन अपराध है। गांवों से यह प्रथा समाप्त होनी चाहिए। समुदाय की भागीदारी से ही यह प्रथा समाप्त हो सकेगी।
सामुहिक रूप से सभी उपस्थित सदस्यों ने शपथ पत्र के माध्यम से यह बात दुहराई कि हम न बाल विवाह करेंगे ओर न ही अपनी जानकारी में किसी का बाल विवाह होने देंगे। यदि ऐसा होता है तो हम इसका विरोध करेंगे। साथ ही, हम अपने-अपने गांव में भी इसकी जानकारी देते हुए एक अच्छा वातावरण का निर्माण करेंगे ताकि, गांव का हर बच्चा पढ़ सके और परिवार का, गांव का एवं राष्ट्र का नाम उंचा कर सके।

बाल मजदूर विरोधी दिवस के अवसर पर स्कूली बच्चों के साथ विविध कार्यक्रम


बाल अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं बाल मजदूरी प्रथा को समाप्त करने के उद्देश्य से संस्था समर्पण एवं चाइल्डलाईन की ओर सेे बाल मजदूर विरोधी दिवस के अवसर पर लरियाडीह एवं जयनगर में स्कूली बच्चों के साथ विविध कार्यक्रम का आयोजन किया गया। चाइल्ड लाईन के आशीष कुमार ने कहा कि जब कोई बच्चा बीमार और अकेला हो, बच्चे को आश्रय की जरूरत हो, कोई बच्चा यदि गुम हो गया हो, उत्पीड़न के शिकार हों तो आप ऐसे मामले को भी 1098 पर दर्ज कराया जा सकता है। यह 24 घंटे चलने वाली एक टाॅल फ्री नंबर है।
इसके बाद बच्चों ने अपनी मन की बात एवं सपनों को कागज के टुकड़ों पर पेंटिंग, निबंधन, स्लोगन एवं भाषण के माध्यम से व्यक्त की। इस कार्यक्रम में भाग लेने वालों में रश्मि कुमारी, शाम्भवी, चंद्रकला मालाकार, सोनम ंिसंह, सौम्या सिंह, क्रांति कुमारी, मीरा कुमारी, कुमार आशुतोष, प्रिंस कुमार, विवेव कुमार, प्रेम राज आदि दर्जनों बच्चों ने भाग लिया।

Saturday, May 28, 2016

शराबमुक्त पंचायत बनाने हेतु सहयोग की अपील



Koderma के Bangakhalar, Dhab, Dhorakola सहित कई panchayat होंगे शराबमुक्त ।
महिलायों ने किया यह ऐलान। इस नेक काम औऱ sangharsh के लिये आप सभी का भी सहयोग जरुरी है।

Sunday, April 10, 2016

हमें गर्व है अपनी सभ्यता और संस्कृति पर ..........

झारखण्ड यानी 'झार' या 'झाड़' जो स्थानीय रूप में वन का पर्याय है और 'खण्ड' यानी टुकड़े से मिलकर बना है। अपने नाम के अनुरुप यह मूलतः एक वन प्रदेश है जो झारखंड आंदोलन के फलस्वरूप सृजित हुआ। प्रचुर मात्रा में खनिज की उपलबध्ता के कारण इसे भारत का 'रूर' भी कहा जाता है। 
कोडरमा का इलाका इस मानकों से अछूता नहीं है।  समर्पण विगत एक साल से ऐसे ही इलाको में खाशकर डोमचांच के माइका माइंस व जंगल क्षेत्र में कार्य करना एवं ऐसे इलाकों से कुछ सीखना प्रारंभ किया है।  जहाँ बुनियादी सुविधाओं का घोर आभाव है।  ढोदाकोला, बंगाखलार, ढाब, सपही जैसे पंचायतों के गावों में हम जैसे लोगो को एक दिन बिताना कठिन है।  यहाँ के लोग लोकतंत्र से परे भले जरूर हों, पर अपनी संस्कृति और सभ्यता से पूरी तरह लब्बोलुआब है। यूँ तो, झारखंड क्षेत्र विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों एवं धर्मों का संगम क्षेत्र कहा जाता है। जो इस इलाको में भी देखने को मिलता है।  
2 दिन पहले जब हम अपने साथियों क्रमश आशुतोष और सन्नी के साथ गावं गए तो कई नए अनुभव हुवे. सांस्कृतिक परम्परा और समाज–संस्कृति पर विचार पर चर्चा किया। संस्कृति और लोकतंत्र में क्या अंतर है..... हुनर और ज्ञान क्या है ....   इसे जाना।सरहुल पर्व को लेकर चर्चा किया। आज मरियमपुर में आयोजित जिलास्तरीय सरहुल महोत्सव में उस इलाकों से काफी संख्या में लोग आये और झारखंडी होने का परिचय दिया. हमें गर्व है अपनी सभ्यता और संस्कृति पर ................







Wednesday, March 30, 2016

जरूरी है षिक्षा का अधिकार कानून का 100 प्रतिषत क्रियान्वयन

कैंपेन फाॅर राईट टू एडुकेषन इन झारखंड (क्रेज) एवं संस्था समर्पण की ओर से स्थानीय वर्णवाल सेवा सदन, कोडरमा में षिक्षा अधिकार कानून 2009 एवं स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों के अधिकारों एवं कर्तव्यों को लेकर जिलास्तरीय क्षमतावर्द्धन कार्यषाला का आयोजन किया गया। कार्यषाला के मुख्य अतिथि जिला बाल संरक्षण ईकाई के एलपीओ दिनेष कुमार पाल, राजकीयकृत मध्य विधालय इंदरवा के प्रधानाध्यापक सुभाषचंद्र, रांची से आये क्रेज के काॅर्डिनेटर अमन राज, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के बालेष्वर राम, स्वराज फाउंडेषन के अजय कुमार, उमा देवी, अधिवक्ता षिवनंदन कुमार शर्मा आदि उपस्थित थे।
दिनेष कुमार पाल ने षिक्षा अधिकार कानून के प्रावधानों की चर्चा करते हुए कहा कि स्कूल प्रबंधन समिति फिलहाल अपने दायित्व नहीं निभा रहे हैं। जिस दिन समिति अपनी भुमिका में आ जायेंगे, उस दिन से सभी सरकारी विधालय माॅडल बन जायेंगे। उन्होंने कहा कि षिक्षा का अधिकार प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है। इसके तहत 6-14 आयुवर्ग के हर वर्ग के बच्चों को निःषुल्क और अनिवार्य षिक्षा का अधिकार है।
प्रधानाध्यापक सुभाष चंद्र ने कहा कि कोडरमा सरकार ने ही षिक्षा को कई श्रेणियों में बांटकर रख दिया है। उन्होंने कहा कि स्कूल विकास योजना निर्माण में स्कूल प्रबंधन समिति का अहम रोल है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक जागरूकता, सिक्रियता एवं सहभागिता से बच्चों का विकास एवं संरक्षण संभव है।
बालेष्वर राम ने कहा कि बच्चों के विकास के लिए सरकार की ओर से कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं लेकिन, जानकारी के अभाव में इसका लाभ ग्रामीण या बच्चे नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एसएमसी विधालय का मैनेजर और ड्राइवर की तरह है।
अधिवक्ता षिवनंदन कुमार शर्मा ने कहा कि आरटीई में अभी भी कई खामियां है जहां संषोधन की आवष्यकता हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन से सरकारी अधिकारी व कर्मचारी अपने बच्चों को सरकारी विधालय में पढ़ाना प्रारंभ करेंगे, उस दिन से षिक्षा जगत में बुनियादी परिवर्तन आ जायेगा और यह काम सिस्टम में बैठे वरीय पदाधिकारी के एक निर्णय से संभव है।
जिला बाल कल्याण समिति के सदस्य राजकुमार सिन्हा ने कहा कि षिक्षा का अधिकार कानून 2009 के सभी मानकों व प्रावधानों को सुनिष्चित करने के लिए षिक्षक, पंचायत जनप्रतिनिधि एवं एसएमसी सदस्यों के बीच पारदर्षिता, सहभागिता, समन्वय एवं समुचित प्रषिक्षण बहुत जरूरी है।
क्रेज के काॅर्डिनेटर अमन राज ने कानून से जुड़े तमाम पहुलूओं पर प्रकाष डालते हुए कहा कि षिक्षा अधिकार कानून का बनना देष के लिए एक बड़ी जनउपलब्धि है। इस कानून का 100 प्रतिषत क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह कानून किताबों में सिमट कर रह गया हैं।
कार्यषाला में MHPJ के सुषील द्विवेदी, चाइल्डलाइन के संतोष कुमार वर्णवाल, कृष्ण प्रसाद, मनोज दांगी, बहादुर प्रसाद यादव, जितेन्द्र कुमार सिंह, संतोष कुमार पांडेय, रितीका कुमारी, रेखा देवी, अषोक यादव, आकांक्षा कुमारी, कुन्दन कुमार, संजय सिंह, डा0 अजय रंजन, तुलसी कुमार साव, सन्नी कुमार, आषुतोष कुमार, राजेन्द्र कुमार, बसंती, आरती, मुन्नी देवी, मुकेष कुमार, राम किषुन संुडी, आषीष कुमार सहित 60 लोगों ने भाग लिया।
संचालन संस्था सचिव इन्द्रमणि साहू एवं धन्यवाद ज्ञांपन मेरियन सोरेन ने किया।

Saturday, March 26, 2016

पंचायत जनप्रतिनिधियों एवं स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों के अधिकारों एवं कर्तव्यों को लेकर एकदिवसीय क्षमतावर्द्धन कार्यषाला का आयोजन

बाल अधिकार जागरूकता अभियान के तहत संस्था समर्पण की ओर से लोकाई में पंचायत जनप्रतिनिधियों एवं स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों के अधिकारों एवं कर्तव्यों को लेकर एकदिवसीय क्षमतावर्द्धन कार्यषाला का आयोजन किया गया। अध्यक्षता लोकाई पंचायत के मुखिया चमारी साव ने किया।
कार्यषाला में रिसोर्स पर्सन के रूप में सर्व षिक्षा अभियान के बिनोद कुमार गुप्ता, ज्ञान विज्ञान समिति के महासचिव असीम सरकार एवं संस्था सचिव इन्द्रमणि साहू आदि उपस्थित थे।
श्री गुप्ता ने षिक्षा अधिकार कानून के प्रावधानों की चर्चा करते हुए कहा कि स्कूल प्रबंधन समिति के सक्रिय होने से ही विधालय व बच्चों का भला हो सकेगा। बच्चों के विकास के लिए सरकार की ओर से कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं लेकिन, जानकारी के अभाव में इसका लाभ ग्रामीण या बच्चे नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने बुनियाद, प्रयास एवं कस्तुरबा गांधी आवासीय विधालयों की महता पर प्रकाष डालते हुए कहा कि बाल अधिकारों को सुनिष्चित करने के लिए षिक्षक, पंचायत जनप्रतिनिधि एवं एसएमसी सदस्यों के बीच पारदर्षिता, सहभागिता एवं समन्वय जरूरी है।
असीम सरकार ने कहा कि षिक्षा अधिकार कानून का बनना देष के लिए एक बड़ी जनउपलब्धि है। अब इसे जमीन पर उतारने के लिए सामुहिक प्रयास की आवष्यकता है। सरकार पर जनदवाब बनाकर या फिर न्यायलय का शरण लेकर इस कानून का 100 प्रतिषत क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह कानून किताबों में सिमट कर रह गया हैं। हर जगह इस कानून का घोर उल्लंघन हो रहा है। उन्होने कहा कि सवाल उठते रहने से भी समस्याओं की ओर अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट होता है।

Saturday, March 19, 2016

आंगनबाड़ी केंद्र मात्र खिचड़ी केंद्र बन कर न रह जाय......

बच्चों को स्वस्थ्य एवं पोषण के साथ-साथ बच्चों को शिक्षा के लिये प्रेरित करने का एक केन्द्र है आंगनबाड़ी केंद्र। जहां बच्चों को स्कूल जाने से पहले की तैयारी किया जाता है। बच्चों को खेल-कूद एवं मनोरंजन के माध्यम से गिनती, वर्णमाला की ज्ञान दिया जाता है। ताकि बच्चे 6 साल के बाद वह स्कूल के वातावरण में सही सलामत शामिल होकर शिक्षा ले सके। इसके लिए आंगनबाड़ी सेविका को प्रषिक्षण भी दिया गया है। लेकिन, न आंगनबाड़ी सेविका की ओर से और न आम पब्लिक की ओर से यह काॅन्सेप्ट पूरी तरह लागू हो पाया है कि आंगनबाड़ी नर्सरी स्कूल है। स्वयंसेेवी संस्थाओं से अच्छादित कुछेक आंगनबाड़ी केंद्र को छोड़ दिया जाय तो बाकी आंगनबाड़ी केंद्र मात्र खिचड़ी केंद्र बन कर रह गया है। हमलोगों ने पाया है कि ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों में स्कूलपूर्व षिक्षा की तैयारी नहीं किया जाता है या फिर किया जाता भी तो जैसे-तैसे। इसके पीछे निम्न कारण देखा गयाः 
  • सेविकाओं में अभिरूची की कमी। 
  • सेविका अलग से कामों में व्यस्त रहना।
  • आनन्दमयी शिक्षा के प्रति सेविकाओं में समझ की कमी।
  • केंद्र में अध्ययन तालिका का नहीं रहना। 
  • उपर लेवल से प्रोपर माॅनिटरिंग नहीं।
  • अभिभावक की लापरवाही।
  • सेविकाओं को आनंददायी षिक्षा का प्रोपर प्रषिक्षण नहीं दिया गया है।
  • लर्निंग मैटेरियल का उपयोग नहीं, टूटने-फूटने के डर से। 
  • मानदेय मिलने में देरी होने से बच्चों व कार्य के प्रति उत्साह नहीं।

उक्त सवालों व तथ्यों के आधार पर समर्पण एवं क्रेज की ओर से कोडरमा प्रखंड के इंदरवा, लोकाई एवं पांडेयडीह पंचायत के 10 गांवों में आंगनबाड़ी पहुंच अभियान चलाया जा रहा है।  

आँगनवाडी पहुंच अभियान का उद्देष्य:- 
  • 3-6 आयुवर्ग के सभी बच्चों को आँगनवाडी केन्द्र से जोडना एवं छिजन दर में कमी लाना।
  • 3-6 आयुवर्ग के सभी बच्चों को स्कूल पूर्व षिक्षा की सेवाएं उपलब्ध करवाना। 
  • आनंददायी षिक्षा के प्रति सेविकाओं में अभिरूचि पैदा करना एवं बच्चों के प्रति समर्पण का भाव जगाना।
  • आंगनबाड़ी केन्द्रों में स्कूल पूर्व शिक्षा के लिए बच्चों की उपस्थिति बढ़ाना।
  • आंगनबाड़ी केन्द्रों में आनन्दमयी शिक्षा के लिए सामग्री सुनिश्चित कराना।
  • जिन गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है, वहां नये आंगनबाड़ी केंद्र की मांग करना।
  • आंगनबाड़ी में मिलने वाली 6 सेवाओं को सुनिष्चित कराना।
  • गर्भवती महिलाओं एवं 3-6 आयुवर्ग के बच्चे जो सेवाओं से वंचित है का लिस्ट तैयार कर एडभोकेषी करना। 
हमारा प्रयास :
  • आंगनबाड़ी केन्द्रों में स्कूल पूर्व शिक्षा के लिए बच्चों की उपस्थिति बढ़ाना।
  • आंगनबाड़ी केन्द्रों में आनन्दमयी शिक्षा के लिए सामग्री सुनिश्चित कराना।
  • आनंदमयी शिक्षा के प्रति सेविकाओं को समझ विकसित कराना।
  • आनन्दमयी शिक्षा से बच्चों की शिक्षा स्तर को विकसित कराना।
  • आंगनबाड़ी केन्द्र से बच्चों की छिजन दर में कमी लाना।












Friday, March 11, 2016

Announcement regarding vacancy at SAMARPAN

                             SAMARPAN

Adv./Letter No. 215/2015-16 Date: 10.03.2016
Samarpan is a civil society institution working on the issues of Child Rights and protection at Koderma. For details of our work, Plz. Visit our website www.samarpanjharkhand.org
Samarpan inviting the suitable candidates for child line on the post mentioned below on contractual basis:
No.
Job Title
Job Location
Number of Vacancies
Essential Qualifications
Salary/PM
1.      
Coordinator
Koderma
1
Master Degree in sociology/ Anthropology/MSW with 2-3 years experience in ground level activities, preferably in working with children is desirable. 
14000/
2.      
Team Members
Koderma
6
Bachelor Degree/MSW with 2-3 years experience in ground level activities, preferably in working with children is desirable. 
8000/
3.      
Counselor
Koderma
1
Master Degree in sociology/psychology/ Anthropology/MSW with 01 year experience or Graduate in psychology/social Work/ sociology/ Anthropology with 03 years experience in the field of counseling in child Rights sector.
8000/
4.      
Volunteer
Koderma
1
Metric with 2-3 years experience in profit/nonprofit organization. 
6000/

How to apply:

Interested Candidates are requested to send Application/CV at samarpanjharkhand@gmail.com or office address. The last date for receiving the application/CV for the above post is 22/03/2016 till 5:00 PM.

Selection Procedure:- The selection of the candidates will be on the basis of written examination and personal interview depending on the number of applications received.

Note: Only shortlisted candidates will be contacted.

(Indramani Sahu)
Secretary
Samarpan,
Sundernagar, Koderma
825410 (Jharkhand)
Mob. 9934148413